किसान भाइयों के लिए दिसम्बर माह के द्वितीय पखवाड़े हेतु महत्वपूर्ण सलाह ।

मौसम के अनुसार कृषि सलाह
दिसम्बर का दूसरा पखवाड़ा शुरू हो गया है इसके साथ ही देश के उत्तरी भागों में ठंडक बढती जा रही है | साथ ही उतरी ओर पूर्वी भागो में भारी ओला वृष्टि से भी ठंडक तेजी से बढ़ी है जिससे पाले की संभावना बढ़ गयी है । इस मौसम में रबी फसल की बुआई हो चुकी है तथा कुछ फसल की बुआई चल रही है | ऐसे मौसम में किसानों को खेती किसानी एवं पशुपालन के लिए क्या करना चाहिए इसको लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए सलाह जारी की है | जो किसान बुआई कर रहें हैं इसमें बीजों का चयन महत्वपूर्ण हो जाता है | गेहूं की बुआई अभी ज्यादा मात्रा में बुवाई के लिए शेष है | राजेंद्र प्रसाद कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों के लिए अभी 3-4 दिनों हेतु यह कार्य करने की सलाह दी है |
इस सप्ताह मौसम का अनुमान :-
इस सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक बादल छायें रहेंगें | इस सप्ताह के दौरान वर्षा होने की संभावना नहीं है | न्यूनतम सापेक्षिक आर्द्रता लगभग 60% और अधिकतम सापेक्षिक आद्रता लगभग 90% होने की संभावना है | न्यूनतम तापमान लगभग 12 डिग्री सेन्टीग्रेट और अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेन्टीग्रेट होने की संभावना है |

राई की खेती हेतु किसान सलाह :-
राई की बुआई हो चुकी है पिछेती राई की बुआई के लिए किसान इन किस्मों कि बुवाई करें | राजेन्द्र राई पिछेती राजेन्द्र अनुकूल राजेन्द्र सुफलाम बीज दर 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है और बाविस्टिन 50%, 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज उपचार के बाद बुआई करनी चाहिए | पौधे से पौधे की दुरी 15 से.मी. होनी चाहिए और पंक्ति से पंक्ति की दुरी 30 से.मी. होनी चाहिए तथा 8–10 टन गोबर की खाद और N.P.K. की मात्रा 80:40:40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयोग करें |

मक्का की खेती कर रहे किसान क्या करें ?
आगामी सप्ताह में बारिश की संभावना नहीं है, इसलिए फसल की सिंचाई कर सकते हैं | बुआई के 20–25 दिन बाद प्रथम निराई एवं बुआई के 40–50 दिन बाद दूसरी निराई करने की सलाह दी जाती है | यदि जंगली घास का संक्रमन अधिक है तो एट्राजिन 500 ग्राम 200 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें एवं निराई करने के बाद उर्वरक का उपयोग करें |
गेहूं की खेती के लिए यह काम करें :-
वर्तमान तापमान गेहूं की किस्में जैसे कि DBW 14, HD 2985, HI 1563, NW 2036, HW 2045, PBW 373, WR 544, HD 2643 और RAJ 3765 इत्यादी का चयन करें | शुष्क मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुये किसानों को सलाह दी जाती है कि वे शीघ्र बोई गई गेहूं की फसल की सिंचाई करें | (बुआई के 21 – 25 दिन बाद) | सिंचाई के 3 – 4 दिनों के बाद नाईट्रोजन की दूसरी खुराक का प्रयोग करें | दीमक को नियंत्रित करने के लिए क्लोरपायरीफास 20% ई.सी. 3–4 मिली/ किलोग्राम बीज और 0.8 – 1.2 लीटर / एकड़ की दर से मिटटी में छिड़काव करें |

चने की खेती करने वाले किसान यह काम करें :-
इस समय चने की खेती के लिए किस्म की बुआई जैसे पीजी 186, पूसा – 362, पूसा – 372 की बुआई करनी चाहिए | पंक्ति से पंक्ति की दुरी 30 से 40 से.मी. तक होनी चाहिए | बीजोपचार के लिए बुवाई पूर्व सिंचाई करें | बीज आकार के आधार पर 95 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की दर एक हेक्टेयर के करें | बीज को 8 से 10 सेन्टीमीटर गहरा रखा जाना चाहिए क्योंकि उथल का उपचार बुआई से पहले 2.24 % थीरम या कर्बेन्डाजिम (बाविस्टिन) के साथ किया जाना चाहिए | डाई अमोनियम फास्फेट 100 किलोग्राम / हेक्टेयर के माध्यम से नाईट्रोजन और फास्फेट का उपयोग करें |

प्याज की खेती करने वाले किसान यह काम करें :-
रबी प्याज की रोपाई की सलाह दी जाती है | एग्रीफाउंड लाइट रेड (एलर), अर्का निकेतन, न-2-4-1, पूसा –रेड, भीमराज, नाशिक लाल किस्मों की रोपाई के लिए इत्यादी किस्मों की सलाह दी जाती है | पंक्ति से पंक्ति की दुरी 30 से.मी. तथा पौधा की दुरी 15 से.मी. तक होनी चाहिए | N.P.K. 120:100:60, 20 – 40 किलोग्राम / हेक्टेयर और गोबर की खाद 80 – 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयोग करें | खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए रोपने के 1-2 दिनों के बाद पेंडीमाथलिन 3.0 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड्कावा करें |

पशुपालक यह कार्य करें :-
जानवरों में बाहरी परजीवियों को नियंत्रित करने के लिए , उन्हें ब्युटोक्स औषधि प्रदान करें | पशुओं को भोजन के साथ नमक दें और छाया में रखें | मवेशियों में गाँठ त्वचा रोग को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सकों से संपर्क रखें | कम तापमान के कारण रात में जानवरों को गर्म स्थानों पर रखें | खुरपका मुँहपका रोग से बचाव के लिए समय पर टिकाकरण करवाए । पशुओ को सर्दी से बचाव के लिए गर्म मेट का प्रयाग करे और टिनशेड लगवाये ।

फसलों को पाले से बचाव के उपाय :-
शीतलहर का प्रकोप शुरू हो चुका है जिससे फसलों पर पाले के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है अतः फसलों को पाले से बचाने के लिए किसान भाई गंधक के तेजाब का 0.01% छिड़काव का छिड़काव करें ।सांय काल मे खेत की मेड़ो पर कचरा जला कर के धुंआ करे ओर फसलों में सिंचाई करके भी फसलों को कुछ हद तक पाले से बचाया जा सकता है ।

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