यूरिया की किल्लत किसानों के लिए बनी मुसीबत ।

यूरिया की किल्लत किसानों के लिए बनी मुसीबत ।

  • by Team Krishi Samachar
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भारत देश कृषि प्रदान देश है और देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवो में निवास करती है जिसके जीविकोपार्जन का मुख्य व्यवसाय कृषि है और यह कृषि मानसून आधारित है क्योंकि देश मे सभी जगह सम्पूर्ण सिंचाई की व्यवस्था नही है । प्रदेश के अंदर रबी फसलों की बुवाई करीब करीब पूरी होने वाली है । इस वर्ष उत्तर भारत में अच्छी वर्षा होने से रबी के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है ,जिससे उत्पादन भी बढ़ने के आसार है ।इस समय फसलों में प्रथम पानी देने का कार्य किसान भाई शुरू कर चुके है जिसके लिए यूरिया ओर अन्य सूक्ष्म तत्व वाले उर्वरकों के प्रयोग का भी उचित समय है। किन्तु इस समय देश के बहुत से क्षेत्रो में  यूरिया की कमी भी देखने को मिल रही है  जिससे किसान भाई परेशान हो रहे है अतः किसान भाइयों से निवेदन है कि समय पर ही उर्वरकों की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेवे ताकि फसलों को किसी प्रकार की हानि नही हो सके। हालांकि राज्य सरकारों ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि अपने अपने क्षेत्रों में यूरिया व अन्य उर्वरकों की उपलब्धता हर किसान को सुनिश्चित करें ओर उर्वरकों की कालाबाजारी रोके व ऐसा करने वालो के खिलाफ कठोर कार्यवाही करें। 

यूरिया का उपयोग भूमि में नाइट्रोजन की पूर्ति करने हेतु किया जाता है क्योंकि की यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन पाई जाती है । यूरिया नमी शीघ्रता से ग्रहण करता है और घुलनशील उर्वरक है । जिसका प्रयोग बुवाई ओर सिंचाई के समय किया जाता है ।इस का प्रयोग प्रदेश में बढ रहा है क्योंकि उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान भाई बिना मृदा परीक्षण के उर्वरकों का उपयोग करते है जिससे यूरिया कि सही मात्रा का निर्धारण नही हो पाता है । वैसे वायुमंडल में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन पाई जाती है किंतु पोधो द्वारा इस का प्रयोग केवल दलहनी फसलों के अलावा नही किया जाता है ।क्योंकि दलहनी फसलों की जड़ो में राइजोबियम जीवाणु पाया जाता है जो वायुमण्डल की नाइट्रोजन को पोधो को उपलब्ध कराने में सहयोग करता है अतः दलहनी फसलों के बीजों को राइजोबियम जीवाणु से उपचारित करके बोना चाहिए । इस कारण फसल चक्र में दलहनी फसलों को समलित किया जाता है ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे ।

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